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Drishyam: The Conclusion Review: आखिरी खेल में विजय जीता या नहीं?

Key facts about this title
Title Drishyam: The Conclusion
Director Abhishek Pathak
Writer Aamil Keeyan Khan, Abhishek Pathak, Parveez Shaikh
Cast Ajay Devgn, Tabu, Shriya Saran, Jaideep Ahlawat, Prakash Raj, Rajat Kapoor, Ishita Dutta, Mrunal Jadhav
Genre Crime, Drama, Mystery, Thriller
Language Hindi
Runtime 2h 30m
Certificate UA 16+
Released October 2, 2026
Where to watch Theatres
Our score 3.5 / 5
3.5 /5 One-time watch
Story 3.5
Acting 4
Direction 3.5
Visuals 3.5
Music 3
Entertainment 4

अगर आपको Vijay की planning, police investigation और धीरे-धीरे खुलते रहस्य पसंद हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है। लेकिन अगर आप पहले दो parts जैसी हर मिनट कसी हुई कहानी चाहती हैं, तो कुछ जगह थोड़ी शिकायत जरूर होगी।

इस बार सवाल सिर्फ 2 अक्टूबर का नहीं है

Drishyam: The Conclusion की सबसे बड़ी ताकत यह है कि फिल्म Vijay Salgaonkar को एक बार फिर ऐसी जगह खड़ा करती है जहाँ पुरानी तरकीबें काफी नहीं लगतीं।

पिछली फिल्मों के बाद Vijay और उसका परिवार अपनी जिंदगी संभालने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पुराने मामले की परछाईं अभी गई नहीं है। Meera Deshmukh के लिए उसके बेटे Sameer की मौत अब भी खत्म न हुआ दर्द है।

फिर entry होती है SP Crime Rajveer Singh Tomar की। यह किरदार Jaideep Ahlawat ने निभाया है और उसके पास Vijay के खिलाफ एक नया रास्ता है। केस दोबारा खुलता है और Vijay का बनाया हुआ पूरा बचाव फिर से सवालों के सामने आ जाता है।

यहीं से मुझे लगा कि फिल्म फिर अपने पुराने रंग में लौट रही है।

लेकिन इस बार एक फर्क है। विजय के सामने सिर्फ पुलिस नहीं है। उसके सामने ऐसा पुलिस अफसर है जो उसके पुराने खेल को समझने की कोशिश कर रहा है।

अब देखना यही है कि कौन किससे दो कदम आगे निकलता है।

कहानी: पुरानी दुनिया, नया खेल

फिल्म की कहानी नई दिशा में जाती है, और यही इसका सही फैसला है।

यह Malayalam Drishyam 3 की सीधी कहानी नहीं है। Hindi franchise ने अपनी अलग कहानी चुनी है। इसलिए आपको वही घटनाएँ दूसरी भाषा में दोहराई हुई नहीं मिलतीं।

शुरुआत में फिल्म पिछली कहानी से जरूरी connections जोड़ती है। फिर नया investigation शुरू होता है।

Vijay अपने परिवार को बचाना चाहता है। Meera को अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहिए। Rajveer को भरोसा है कि इस बार उसके पास ऐसा सुराग है जो Vijay की सारी planning को उलट सकता है।

मुझे यही basic conflict सबसे ज्यादा पसंद आया। तीनों तरफ अपनी-अपनी वजह है और फिल्म किसी एक तरफ जाकर कहानी को आसान नहीं बनाती।

बीच-बीच में फिल्म कुछ बातें जरूरत से ज्यादा समझाती है। मुझे लगता है कि यहाँ दर्शक को थोड़ा खुद सोचने का मौका दिया जाता, तो suspense का मज़ा और बढ़ता।

Direction और Screenplay

Abhishek Pathak ने suspense को जल्दी खोलने के बजाय सवालों को धीरे-धीरे बढ़ाया है।

फिल्म का screenplay Aamil Keeyan Khan, Abhishek Pathak और Parveez Shaikh ने लिखा है। Dialogues Aamil Keeyan Khan के हैं।

पहले हिस्से में setup थोड़ा ज्यादा है। मुझे लगता है कि कुछ scenes छोटे होते तो कहानी और कस जाती।

लेकिन जैसे-जैसे Rajveer और Vijay आमने-सामने आते हैं, फिल्म पकड़ बनाती है। खासकर interval के आसपास tension बढ़ती है और फिर कहानी अपने असली खेल में जाती है।

दूसरे हिस्से में courtroom और investigation वाला material ज्यादा interesting हो जाता है। फिल्म पुराने सवालों के जवाब देने की कोशिश करती है और कई पुराने धागों को आखिर तक ले जाती है।

मेरी शिकायत बस इतनी है कि कुछ solutions बहुत आसानी से मिल जाते हैं। Drishyam जैसी फिल्म में मैं चाहती हूँ कि हर बड़ी चाल के पीछे साफ वजह दिखाई दे।

यहाँ कुछ जगह मुझे लगा कि कहानी को आगे बढ़ाने के लिए थोड़ी सुविधा ले ली गई।

Acting: यहाँ फिल्म सबसे मजबूत है

Ajay Devgn फिर से Vijay Salgaonkar की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं।

Vijay का किरदार ज्यादा बोलकर अपनी planning नहीं बताता। चेहरे पर डर दिखाना हो, सामने वाले को पढ़ना हो या बिना कुछ कहे स्थिति समझनी हो, Devgn इन छोटे moments को अच्छे से पकड़ते हैं।

मुझे खास तौर पर उनकी controlled performance पसंद आई। वह हर scene में एक जैसा expression लेकर नहीं बैठते। दबाव बढ़ता है तो उनका Vijay भी धीरे-धीरे बदलता दिखाई देता है।

Tabu को इस बार उतना material नहीं मिला जितना मुझे चाहिए था, लेकिन जब वह screen पर आती हैं तो कहानी का emotional weight बढ़ जाता है।

Meera का दर्द इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू है। वह सिर्फ Vijay की opponent नहीं हैं। उनके लिए मामला personal है और Tabu उस बेचैनी को ज्यादा शोर किए बिना निभाती हैं।

Jaideep Ahlawat इस फिल्म के लिए बहुत जरूरी addition हैं।

Rajveer को सिर्फ “नया पुलिस वाला” बनाकर छोड़ देना आसान था। लेकिन Ahlawat उसे अपनी authority देते हैं। उनके scenes में एक दबाव महसूस होता है और Vijay के साथ उनकी टक्कर फिल्म को जरूरी energy देती है।

हाँ, character को कुछ जगह ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं थी। जितना कम Rajveer समझाता, उतना ही उसका असर बढ़ता।

Shriya Saran को family angle संभालने का काम मिला है और वह ठीक बैठती हैं।

Nandini की चिंता और परिवार पर दोबारा आने वाले खतरे का असर उनके scenes में दिखाई देता है। लेकिन इस बार कहानी Vijay और investigation पर ज्यादा टिकी हुई है, इसलिए उनका हिस्सा थोड़ा पीछे रह जाता है।

Prakash Raj courtroom वाले हिस्सों में अपनी पकड़ दिखाते हैं।

उनकी presence कहानी को थोड़ा अलग रंग देती है। Rajat Kapoor भी Meera के साथ वाले हिस्सों में ठीक लगते हैं।

Ishita Dutta और Mrunal Jadhav को ज्यादा बड़ा dramatic space नहीं मिलता, लेकिन दोनों family unit का हिस्सा बने रहते हैं।

Music, BGM और Songs

इस फिल्म में songs से ज्यादा BGM काम करता है।

Music composers Ravi Basrur, Rochak Kohli और KARMA हैं, जबकि background score Amar Mohile ने दिया है। Official credits में इसकी पुष्टि है।

मुझे Daastaan: The Drishyam Recap concept अच्छा लगा। यह track पिछली दोनों फिल्मों की journey को याद दिलाता है और final chapter के mood में ले जाता है। Album में Vingansa, Muskura Do और Game Over जैसे tracks भी हैं।

लेकिन अगर आप मुझसे पूछें कि क्या songs फिल्म के बाद भी मेरे दिमाग में घूमते रहेंगे, तो जवाब है नहीं।

यहाँ music का असली काम atmosphere बनाना है और BGM उस काम में ज्यादा सफल है।

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Visuals

Visuals कहानी से ज्यादा माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं।

Goa की setting फिल्म को खुली जगह देती है, लेकिन camera लगातार location दिखाने के चक्कर में नहीं पड़ता। Investigation, घर, police setup और courtroom के बीच visuals कहानी के mood के साथ चलते हैं।

Sudhir Kumar Chaudhary cinematographer हैं और Sandeep Francis editor हैं। Official credits में VFX और sound team की भी जानकारी दी गई है।

मुझे खास तौर पर interrogation और face-off वाले scenes का visual treatment पसंद आया। यहाँ camera characters के चेहरे पर टिकता है और वही tension पैदा करता है।

बस editing में थोड़ी और कैंची चलती तो फिल्म का असर और बढ़ता।

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Dialogues और Writing

Dialogues इस फिल्म को कई जगह मजेदार बनाते हैं, लेकिन कुछ lines थोड़ी ज्यादा लिखी हुई लगती हैं।

Drishyam की writing की खूबी हमेशा से यही रही है कि Vijay साधारण आदमी की तरह बात करता है, लेकिन उसके दिमाग में calculation चल रही होती है।

इस बार भी वही खेल है।

Rajveer और Vijay की बातचीत में फिल्म का असली मजा मिलता है। एक आदमी सच निकालना चाहता है और दूसरा आदमी अपने सच को बचाकर रखना चाहता है।

मुझे courtroom dialogues ज्यादा पसंद आए। वहाँ कहानी सिर्फ evidence पर नहीं चलती, characters की सोच भी सामने आती है।

लेकिन हर dialogue को punchline बनाने की कोशिश कुछ जगह साफ दिखाई देती है।

सच बताऊँ? कम शब्दों में कुछ scenes और ज्यादा असर कर सकते थे।

क्या अच्छा है

  • Ajay Devgn और Jaideep Ahlawat की टक्कर फिल्म को मजबूत बनाती है।
  • नई कहानी होने से फिल्म पिछली फिल्मों की carbon copy नहीं लगती।
  • Climax की तरफ बढ़ता suspense दूसरे हिस्से में फिल्म को अच्छी पकड़ देता है।

क्या कमज़ोर है

  • पहले हिस्से में कुछ scenes जरूरत से ज्यादा समझाते हैं।
  • कुछ clues और solutions बहुत convenient लगते हैं।
  • Family और emotional side को थोड़ा और space मिलता तो Vijay की journey ज्यादा असरदार लगती।

SPOILER ALERT

अब कहानी के आखिरी हिस्से की बात होगी, इसलिए अगर आपने फिल्म नहीं देखी है तो यहाँ रुक जाइए।

फिल्म का बड़ा खेल इस बात पर टिका है कि Rajveer कितनी दूर तक Vijay के पुराने मामले को खोल पाता है और Vijay इस बार अपने परिवार को कैसे बचाता है।

जैसे-जैसे मामला court तक पहुँचता है, फिल्म पुराने सवालों को वापस सामने लाती है। फिर judgement के बाद वाला हिस्सा उन चीजों को जोड़ता है जिनकी तरफ कहानी पहले से इशारा करती रही थी।

यहीं फिल्म अपनी सबसे बड़ी चाल चलती है।

मुझे इस हिस्से की सबसे अच्छी बात यह लगी कि finale सिर्फ “Vijay बच गया या पकड़ा गया” पर खत्म नहीं होता। फिल्म यह भी बताने की कोशिश करती है कि उसके बचाव की पूरी व्यवस्था किस तरह तैयार हुई थी।

लेकिन यही हिस्सा थोड़ा ज्यादा explain भी करता है। मैं चाहती थी कि कुछ जवाब दर्शक खुद जोड़ पाए।

फिर भी आखिरी हिस्से में फिल्म वापस अपनी पकड़ बना लेती है और Vijay की कहानी को खुला छोड़ने के बजाय एक स्पष्ट अंत देती है। यही वजह है कि यह सिर्फ एक और sequel जैसा महसूस नहीं होता।

किसे देखनी चाहिए और किसे skip करनी चाहिए?

अगर आपने पहले दोनों Drishyam parts देखे हैं, तो यह film आपके लिए बनी है।

Vijay, Nandini, Meera और इस पूरे case की पुरानी कहानी जाने बिना तीसरे part का emotional असर कम हो जाएगा।

Family के साथ देखने से पहले certificate जरूर देखें। फिल्म को UA 16+ मिला है। इसलिए छोटे बच्चों के साथ इसे चुनना सही नहीं रहेगा।

अगर आपको crime mystery, investigation और courtroom drama पसंद है, तो इसे theatre में देख सकती हैं।

अगर आपको बहुत तेज कहानी चाहिए और लंबे suspense build-up से परेशानी होती है, तो पहले हिस्से में थोड़ी patience रखनी पड़ेगी।

Box Office और OTT Outlook

Drishyam: The Conclusion 2 अक्टूबर 2026 को theatres में release हुई है। फिल्म के लिए release से पहले advance booking काफी मजबूत रही और शुरुआती reports में बड़ी pre-release ticket sales की बात सामने आई थी।

लेकिन आज की तारीख में पूरे India net या worldwide gross का final verified figure देना जल्दबाजी होगी। इसलिए मैं अनुमान को collection बनाकर नहीं लिखूँगी।

OTT की बात करें तो official OTT release date अभी announced नहीं है। फिलहाल film theatres में है। कुछ third-party streaming listings अलग जानकारी दिखा रही हैं, इसलिए जब तक official platform announcement नहीं आती, मैं उसे confirmed नहीं मानूँगी।

3.5 out of 5
One-time watch

Drishyam: The Conclusion में Vijay Salgaonkar की दुनिया को खत्म करने की कोशिश साफ दिखाई देती है। Ajay Devgn शांत रहते हुए भी फिल्म को संभालते हैं और Jaideep Ahlawat उनके सामने अच्छा दबाव बनाते हैं। कहानी नई दिशा में जाती है, climax में जवाब मिलते हैं और franchise को एक साफ अंत दिया जाता है। लेकिन screenplay हर जगह उतनी कसी हुई नहीं है। कुछ explanations मुझे जरूरत से ज्यादा आसान लगीं और emotional side को थोड़ा और वक्त मिलना चाहिए था।

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