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Pooja Meri Jaan Review: मर्डर से ज्यादा सवाल छोड़ गई फिल्म

Key facts about this title
Title Pooja Meri Jaan
Director Navjot Gulati
Writer Kanishka Singh Deo, Navjot Gulati, Niren Bhatt
Cast Mrunal Thakur, Huma Qureshi, Vikram Singh Chauhan, Vijay Raaz, Chaitanya Vyas
Genre Crime, Drama, Thriller
Language Hindi
Runtime 1h 57m
Certificate U/A 16+
Released October 2, 2026
Where to watch ZEE5
Our score 2 / 5
2 /5
Story 2
Acting 2.5
Direction 2
Visuals 2.5
Music 2
Entertainment 1.5

किसी को प्यार के लिए “हाँ” कहना आपका हक है, तो “ना” कहना भी उतना ही आपका हक है। सवाल तब खड़ा होता है जब कोई उस “ना” को स्वीकार नहीं कर पाता। Pooja Meri Jaan इसी uncomfortable जगह पर हाथ रखती है।

मैंने फिल्म शुरू की तो लगा कि शायद यह rejection, obsession और कानून के बीच एक ऐसा सवाल खड़ा करेगी जिसका जवाब आसान नहीं होगा। और शुरुआत में फिल्म मुझे उस दिशा में जाती भी लगी। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी, मेरी उम्मीद कम होती गई।

फिल्म 2 October 2026 को सीधे ZEE5 पर रिलीज हुई और इसकी लंबाई 117 मिनट है। ZEE5 इसे Hindi crime-drama के तौर पर पेश करता है।

सच बताऊँ? विषय में जितनी आग है, फिल्म की presentation में उतनी गर्मी नहीं है।

ooja Meri Jaan Movie Review में Mrunal Thakur और Huma Qureshi

कहानी

कहानी Pooja के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी तब उलट जाती है जब उसका करीबी Aniket उसके सामने शादी और प्यार की बात रखता है और Pooja उसे स्वीकार नहीं करती।

इसके बाद Aniket की मौत हो जाती है और पीछे छूटता है एक ऐसा आरोप, जो Pooja की पूरी जिंदगी बदल देता है। क्या किसी को reject करना इतना बड़ा अपराध हो सकता है कि उसकी कीमत कानून के सामने चुकानी पड़े?

यहीं से Sana की entry होती है। वह Pooja की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ती है और धीरे-धीरे सामने आती कहानी के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने की कोशिश करती है।

फिल्म past और present के बीच आती-जाती है। यानी जो हुआ, वह भी दिखाया जाता है और उसके बाद उसका असर भी। Idea अच्छा है, लेकिन problem यह है कि मुझे बहुत जल्दी समझ आने लगा कि फिल्म किस दिशा में जा रही है।

और thriller में जब दर्शक फिल्म से पहले answer पकड़ ले, तो tension अपने आप कम हो जाती है।

Direction और Screenplay

सबसे बड़ी कमी मुझे screenplay में लगी।

Screenplay यानी कहानी को scenes, घटनाओं और information में किस तरह आगे बढ़ाया गया है। यहाँ फिल्म के पास discuss करने के लिए बहुत कुछ था, लेकिन वह कई बार मुद्दे को खोलने के बजाय सीधे conclusion की तरफ भागती हुई लगती है।

फिल्म rejection और obsession के बीच का फर्क दिखाना चाहती है। साथ ही यह सवाल भी उठाती है कि किसी इंसान की निजी choice की जिम्मेदारी दूसरे इंसान की जिंदगी पर कितनी डाली जा सकती है।

लेकिन जिस जगह मुझे गहरी psychological पड़ताल चाहिए थी, वहाँ फिल्म ज्यादा आसान रास्ता चुन लेती है।

Courtroom वाला हिस्सा तो और भी कमजोर लगा। इतने बड़े आरोप, पुलिस, वकील और गवाह होने के बावजूद कई जगह मुझे लगा कि फिल्म जरूरी details छोड़कर सीधे अगले scene पर जा रही है।

Courtroom drama में सिर्फ दो लोग आमने-सामने खड़े होकर अपनी बात कह दें, उससे tension नहीं बनती। Evidence, सवाल, जवाब, contradictions और legal strategy भी चाहिए।

यहाँ वही कमी साफ दिखाई देती है।

Direction में भी मुझे वही problem दिखी। कहानी में potential था, लेकिन treatment फीका पड़ गया। फिल्म मुझे सोचने पर मजबूर करने के बजाय कई जगह सिर्फ यह बताती रही कि मुझे क्या सोचना चाहिए।

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Acting

Mrunal Thakur इस फिल्म की सबसे जरूरी कड़ी हैं, लेकिन character को script जितनी जगह चाहिए थी, उतनी मिली नहीं।

Pooja का character ऐसा है जिसे देखकर audience को तुरंत फैसला नहीं करना चाहिए। वह सही है या गलत, उसकी choices कैसी हैं और उसके आसपास के लोग उसे किस नजर से देखते हैं, यही फिल्म का बड़ा हिस्सा है।

Mrunal ने इस ambiguity को निभाने की कोशिश की है। खासकर शुरुआती हिस्से में Pooja के बारे में audience के मन में जो image बनती है, उसे उन्होंने ठीक तरह से संभाला। लेकिन कमजोर writing के कारण performance का असर हर जगह नहीं पहुंचता।

Huma Qureshi को Sana के रूप में देखकर मुझे उम्मीद थी कि courtroom वाला हिस्सा फिल्म को ऊपर उठाएगा। उनकी screen presence मजबूत है और वह character को संभालती हैं, लेकिन उन्हें भी ऐसा screenplay नहीं मिला जो उनके किरदार को पूरी ताकत दे सके।

Vikram Singh Chauhan का Aniket कहानी के लिए बहुत जरूरी है। उनके character में obsession और rejection का जो emotional angle होना चाहिए था, वह मुझे पूरी तरह develop नहीं लगा।

Vijay Raaz का किरदार कहानी में एक अलग सोच लेकर आता है। उनकी मौजूदगी असर छोड़ती है, लेकिन उनके हिस्से की courtroom writing भी उतनी मजबूत नहीं है।

बाकी supporting cast कहानी को आगे बढ़ाती है, मगर कोई character ऐसा नहीं बनता जिसके बारे में film खत्म होने के बाद मैं बहुत देर तक सोचती रहूँ।

Music, BGM और Songs

Music फिल्म की सबसे बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन यह इसे बचाता भी नहीं है।

Vishal Mishra ने music दिया है और “Maharani” फिल्म का रिलीज हुआ song है।

मुझे music functional लगा। कहानी के mood को support करने की कोशिश होती है, लेकिन ऐसा कोई musical moment नहीं आया जिसे मैं फिल्म खत्म होने के बाद अपने साथ लेकर निकलूँ।

इस तरह की फिल्म में BGM suspense बढ़ाने में बहुत मदद कर सकता था। यहाँ वह काम बस ठीक-ठाक तरीके से हुआ।

Music: 2/5.

Visuals

Visuals ठीक हैं, लेकिन यहाँ भी film safe खेलती है।

Camera work कहानी के mood के हिसाब से चलता है और production overall साफ-सुथरा लगता है। लेकिन visuals में ऐसा कुछ खास नहीं है जिसे देखकर मैं कहूँ कि फिल्म ने अपने subject को visually कोई नया रूप दिया।

मेरे लिए 2.5/5 सही है। देखने में परेशानी नहीं होती, लेकिन याद भी नहीं रहता।

Dialogues और Writing

Dialogues में फिल्म का सबसे बड़ा missed opportunity है।

इतने sensitive subject पर लिखते समय dialogue सिर्फ कहानी आगे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि character की सोच दिखाने के लिए भी जरूरी होते हैं।

यहाँ कई जगह बातें बहुत सीधे तरीके से कही गई हैं। मुझे उन grey areas में ज्यादा समय चाहिए था, जहाँ कोई character पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत नहीं होता।

फिल्म gender, rejection और responsibility के बड़े सवाल उठाती है, लेकिन उन सवालों को जितना गहरा किया जा सकता था, उतना नहीं किया गया।

यही वजह है कि concept interesting होने के बावजूद writing मुझे average लगी।

क्या अच्छा है

  • Subject: rejection और obsession को crime और legal angle से जोड़ने का idea मजबूत है।
  • Mrunal-Huma: दोनों performers फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश करती हैं।
  • छोटी लंबाई: 117 मिनट होने के कारण फिल्म बहुत ज्यादा खिंचती नहीं है।

क्या कमज़ोर है

  • Predictability: मुझे काफी पहले समझ आने लगा कि कहानी किस तरफ जा रही है।
  • Courtroom writing: evidence और legal arguments को ज्यादा detail चाहिए थी।
  • Emotional impact: घटनाएँ होती बहुत हैं, लेकिन उनका असर मेरे अंदर उतना नहीं बैठा।

SPOILER ALERT

अब यहाँ से कहानी के अहम हिस्सों पर बात होगी।

फिल्म की सबसे बड़ी दिक्कत मेरे लिए यह रही कि Pooja के आसपास बनी mystery आखिर तक उतनी mystery नहीं रह पाती। Aniket की मौत, Pooja पर लगे आरोप और उसके बाद court में चलने वाली लड़ाई को जिस तरह reveal किया गया है, उसमें मुझे चौंकाने वाला मोड़ नहीं मिला।

मुझे सबसे ज्यादा उम्मीद इस बात से थी कि फिल्म मुझे बार-बार अपना judgement बदलने पर मजबूर करेगी। शुरुआत में Pooja को लेकर एक राय बनेगी, फिर कोई नया evidence आएगा और मैं सोचूँगी कि शायद मामला कुछ और है।

लेकिन film उस खेल को पूरी ताकत से नहीं खेल पाती।

Courtroom में भी बड़े सवाल उठते हैं, मगर उनके जवाब कई बार बहुत सुविधाजनक तरीके से आते हैं। इसलिए climax तक पहुँचते-पहुँचते मेरी curiosity काफी कम हो चुकी थी।

और ending ने उस बचे हुए असर को भी ज्यादा मजबूत नहीं किया।

यही वजह है कि subject खत्म होने के बाद भी मुझे film का emotional impact बहुत कम महसूस हुआ।

किसे देखनी चाहिए / किसे skip करनी चाहिए

अगर आपको crime drama, rejection, obsession और courtroom conflict वाले subjects पसंद हैं, तो Pooja Meri Jaan को एक बार देखा जा सकता है।

लेकिन अगर आपकी पहली उम्मीद दमदार suspense, लगातार twists और ऐसा climax है जो आखिरी मिनट तक आपको guessing में रखे, तो मैं इसे recommend नहीं करूँगी।

Family के साथ देखने की बात करें तो ZEE5 पर इसकी current rating U/A 16+ दिखाई गई है। इसलिए इसे छोटे बच्चों के लिए मैं recommend नहीं करूँगी।

और हाँ, यह फिल्म किसी specific true story पर आधारित होने की officially पुष्टि नहीं करती; इसे fictional crime drama के रूप में पेश किया गया है।

Box Office और OTT Outlook

यह फिल्म सीधे OTT पर ZEE5 पर 2 October 2026 को रिलीज हुई, इसलिए theatrical box office collection लागू नहीं होता। ZEE5 की official listing इसे इसी platform पर available बताती है।

फिल्म को critics से mixed response मिला है। Times of India ने 3/5, जबकि Hindustan Times ने 2.5/5 दिया। Indian Express ने भी premise को promising माना लेकिन treatment को कमजोर बताया।

मेरे हिसाब से इसका OTT advantage यही है कि विषय controversial और discussion-worthy है। लेकिन streaming पर competition बहुत है। इसलिए सिर्फ subject के दम पर फिल्म लंबे समय तक याद रहे, ऐसा मुझे नहीं लगता।

2 out of 5
Wait for OTT

Pooja Meri Jaan का सवाल मजबूत है, लेकिन उसके जवाब कमजोर हैं। फिल्म जिस मुद्दे पर बहस शुरू करना चाहती है, उसी मुद्दे को ज्यादा गहराई चाहिए थी। मेरे लिए यह एक average, predictable crime drama बनकर रह गई।

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