The Paradise 2026 Review: 3 घंटे का Action या सज़ा?
| Title | The Paradise |
|---|---|
| Director | Srikanth Odela |
| Cast | Nani as Jadal, Kayadu Lohar as Subbalakshmi, Raghav Juyal as Vikram Malik |
| Released | September 24, 2026 |
| Our score | 2.5 / 5 |
भाई, फिल्म के पास पैसा है, स्टार है, बड़े-बड़े एक्शन सीन हैं, Anirudh का नाम है, लेकिन कहानी पूछो तो जेब से सिक्का भी नहीं निकलता।
The Paradise शुरू में ऐसा माहौल बनाती है कि लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है। फिर धीरे-धीरे वही फिल्म आपकी patience की परीक्षा लेने लगती है।

माजरा क्या है? कहानी बिना स्पॉइलर
कहानी 1980s के Secunderabad की है, जहां Jadal यानी Nani एक ऐसे समुदाय से आता है जिसे बराबरी और पहचान के लिए लगातार लड़ना पड़ता है। उसके सामने सत्ता और दबदबे वाला Malik परिवार है।
Jadal की अपनी मां Sammakka के साथ भी कहानी जुड़ी हुई है और मां-बेटे का रिश्ता धीरे-धीरे फिल्म का बड़ा हिस्सा बनता है।
ऊपर से Subbu का किरदार है, Malik परिवार के लोग हैं और एक पूरी दुनिया है जिसे Srikanth Odela ने बहुत बड़े पैमाने पर खड़ा करने की कोशिश की है।
फिल्म की असली दिक्कत ये है कि इतनी बड़ी दुनिया बनाने के बाद कहानी को संभालने की जिम्मेदारी भी होती है। और यहीं मामला हाथ से निकल जाता है।
वैसे फिल्म का final runtime करीब 2 घंटे 54 मिनट है और CBFC ने A certificate के साथ 21 बदलाव करवाए थे। इनमें violence, dialogues और कुछ sensitive visuals में बदलाव शामिल थे।
क्या बवाल था
- Nani का पहला हिस्सा पकड़ लेता है। उनका Jadal वाला अंदाज, look और entry वाला swag फिल्म को शुरुआत में अच्छा धक्का देता है। बंदा स्क्रीन पर आए तो स्क्रीन को भी पता चलता है कि हीरो कौन है।
- पहले हाफ का माहौल मजबूत है। एक अलग दुनिया बनाई गई है। शुरुआत में ऐसा लगता है कि अब KGF टाइप बड़ा खेल शुरू होने वाला है। उम्मीदें यहीं आसमान में पहुंच जाती हैं।
- जेल वाला हिस्सा और इंटरवल काम करता है। खासकर मां-बेटे से जुड़ा इंटरवल वाला पल फिल्म को थोड़ी भावनात्मक ताकत देता है। यहां फिल्म सिर्फ मुक्के नहीं मारती, थोड़ा दिल भी छूती है।
- एक्शन में कमी नहीं है। गर्दन, चाकू, खून, मारकाट, हर तरह का इंतजाम है। पहली बार देखकर झटका लगता है। दसवीं बार वही चीज देखकर लगता है भाई, अब रहने भी दो।
- दुनिया और लुक पर मेहनत साफ दिखती है। कई दूसरे रिव्यू भी फिल्म के production design और visuals को इसकी बड़ी ताकत मानते हैं।
कहाँ मामला बिगड़ गया
- कहानी को रबर समझ लिया गया। मां-बेटे की सीधी सी कहानी को chapters और ढेर सारे action scenes के बीच इतना खींचा गया कि बात असर करने से पहले थका देती है। Chapter लिख देने से फिल्म अपने आप धुरंधर नहीं बन जाती।
- दूसरा हाफ सबसे बड़ा झटका है। करीब इंटरवल तक फिल्म उम्मीद देती है, उसके बाद वही मारकाट और वही तनाव बार-बार लौटता है। आखिर में आपका दिमाग फिल्म नहीं, घड़ी देखने लगता है।
- Violence की मात्रा जरूरत से बहुत आगे चली जाती है। एक-दो brutal scene असर करते हैं। लेकिन जब हर थोड़ी देर में खून बहता है तो shock भी EMI की तरह किस्तों में आने लगता है। बाहरी reviews में भी second half और repetitive violence पर सवाल उठे हैं।
- Villains पूरी ताकत से नहीं चल पाए। Raghav Juyal को villain बनाकर लाया गया है, लेकिन किरदार कई जगह इतना अजीब लिखा गया है कि डर से ज्यादा confusion पैदा होता है। Mohan Babu की मौजूदगी जरूर वजन देती है, लेकिन फिल्म उन्हें भी पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती।
- Female character की writing और presentation खटकती है। फिल्म में एक female character को बहुत ज्यादा adult और bold तरीके से दिखाया गया है, लेकिन कहानी में उसका असली काम क्या है, ये सवाल बना रहता है। सिर्फ फिल्म को adult दिखाने के लिए कोई किरदार डाल देना, कहानी नहीं बनाता।
एक्टिंग का रिपोर्ट कार्ड
Nani: फुल मार्क्स। जितना मसाला मिला, उतनी मेहनत पूरी दिखाई। लेकिन भाई, अकेला घोड़ा पूरी बारात नहीं खींच सकता।
Sonali Kulkarni: पास से ऊपर। Sammakka के किरदार में emotional weight है और मां-बेटे वाले हिस्से को उन्होंने संभाला। उनका किरदार फिल्म के दूसरे हिस्से में उतना असर नहीं छोड़ पाता, लेकिन performance में कमी नहीं लगती।
Raghav Juyal: सप्लीमेंट्री आ गई। Energy है, screen presence है, लेकिन character की writing ही उसे तय नहीं करने देती कि ये खतरनाक villain है या बीच-बीच में comedy कर रहा आदमी।
Mohan Babu: पास मार्क्स। उनकी presence villain वाले हिस्से में वजन डालती है, लेकिन writing ने पूरा फायदा नहीं उठाया।
Kayadu Lohar: किरदार ने साथ नहीं दिया। उनकी performance से ज्यादा समस्या character की writing में है। कई जगह लगता है कि उन्हें कहानी के लिए नहीं, फिल्म के adult flavour के लिए इस्तेमाल किया गया।
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स्पॉइलर ज़ोन
चेतावनी: यहां से फिल्म की कहानी खुलकर सामने आएगी।
सबसे पहले बात उस मां-बेटे वाले emotional track की। Sammakka और Jadal का रिश्ता फिल्म की असली जान बन सकता था। इंटरवल के आसपास जो emotional scene आता है, वही उन गिने-चुने पलों में से है जहां फिल्म को लगता है कि भाई, कहानी भी नाम की कोई चीज होती है।
लेकिन इसके बाद फिल्म फिर action के कुएं में कूद जाती है।
Raghav Juyal का Vikram Malik वाला किरदार भी शुरुआत में interesting लगता है। मगर आगे चलकर उसका असर कमजोर पड़ता जाता है। जिस villain से डर लगना चाहिए, वहां कई बार मामला उल्टा comedy की तरफ चला जाता है।
और सबसे मजेदार बात, फिल्म में एक dog वाला हिस्सा ऐसा असर छोड़ देता है कि वह कई इंसानी किरदारों से ज्यादा याद रह जाता है। मां-बेटे के रिश्ते से ज्यादा emotional connection वहां महसूस होना फिल्म की writing के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
फिर आता है violence का तूफान। लोगों को मारने के अलग-अलग तरीके खोजे गए हैं। खून की नदियां बहती हैं। कैमरा भी कई जगह जानबूझकर uncomfortable जगहों तक जाता है। लेकिन समस्या ये है कि जब हर दस मिनट में नया खून दिखाई दे तो डर धीरे-धीरे आदत बन जाता है।
यही वजह है कि पहला हिस्सा और दूसरा हिस्सा दो अलग फिल्मों जैसे लगते हैं। पहला हिस्सा उम्मीद देता है कि कुछ बड़ा आने वाला है। दूसरा हिस्सा उस उम्मीद को पकड़कर इतना खींचता है कि आखिर में रस्सी टूट जाती है।
और Anirudh का music भी इस बार उस स्तर पर नहीं पहुंचता जिसकी उम्मीद थी। Background score कई जगह इतना loud हो जाता है कि dialogue तक दब जाते हैं। हिंदी dubbing में भी कई dialogues साफ सुनाई न देने की शिकायत फिल्म के अनुभव को और कमजोर करती है।
फिल्म को A certificate मिलना भी सिर्फ हवा में नहीं था। CBFC ने 21 changes करवाए थे, जिनमें violent scenes, abusive words, sensitive visuals और कुछ references में बदलाव शामिल थे।
बस दिक्कत ये है कि सेंसर से कटने के बाद भी फिल्म का violence कम महसूस नहीं होता। सवाल मात्रा का नहीं, इस्तेमाल का है। चाकू पचास बार दिखाओगे तो पचासवीं बार चाकू नहीं, आपकी घड़ी दिखने लगेगी।
दूसरे हाफ तक आते-आते Paradise का सबसे बड़ा दुश्मन कोई villain नहीं, खुद उसकी लंबाई और writing बन जाती है।
स्पॉइलर ज़ोन ख़त्म
फाइनल रेटिंग
कहानी/स्क्रीनप्ले: 1/5
डायरेक्शन: 1.5/5
एक्टिंग: 2.5/5
म्यूजिक/BGM: 1.5/5
एंटरटेनमेंट वैल्यू: 1.5/5
ओवरऑल: ⭐⭐ 1.5/5
लेबल: OTT का इंतज़ार करो
Nani की मेहनत दिखती है। पहला हिस्सा कुछ जगह जोर भी मारता है। लेकिन लगभग तीन घंटे की फिल्म में सिर्फ दो-चार सीटी वाले सीन आपकी पूरी टिकट नहीं बचा सकते।
देखें या ना देखें?
अगर आपको बहुत ज्यादा violent mass cinema पसंद है तो थिएटर में कुछ हिस्से काम कर सकते हैं। बाकी लोगों के लिए OTT का इंतज़ार ज्यादा सही रहेगा।
Paradise में स्वर्ग ढूंढने गए थे भाई, interval के बाद तो फिल्म ही सब्र का इम्तिहान लेने लगी।



